Vernacular Names
Assamese
Karpura
Bengali
Karpur
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Etymology
| Sanskrit Synonym | Sanskrit (Diacritical) | Reference | Etymology (Sanskrit) | English Meaning |
|---|---|---|---|---|
| कर्पूरः | Karpūraḥ | किरति विक्षिपति सौरभ्यं पूरयति च प्राणाप्यायनत्वात् । | ||
| घनसारः | Ghanasāraḥ | घनः सान्द्रः सारो नियसिः; घनो मेघ इव सारोऽस्य । | ||
| चन्द्रसंज्ञः | Candrasaṃjñaḥ | शैत्याच्छुभ्रत्वादाह्लादकत्वाच्च, ‘चदि आह्लादने’ । | ||
| शिशिरः | Śiśiraḥ | शीतः स्पर्शे वीर्ये च । | ||
| शीतलरजः | Śītalarajaḥ | शीतलः चूर्णाकारः । | ||
| सिताभ्रः | Sitābhraḥ | श्वेतमेघ इव रूपे प्रभावे च । कैयदेवः ‘शीताभ्रः’ इति पठति । | ||
| स्फटिकः | Sphaṭikaḥ | स्फाटिकाकारः । | ||
| हिमनामा | Himanāmā | शैत्यात् श्वैत्याच्च । | ||
| हिमबालुकः | Himabālukaḥ | कणाकारः शीतश्च । |
Classifications
Properties
Classical Verses Related to Therapeutic Indications
| Vyadhi / Diseases | Context / Formulation | Shloka / Verse | Reference |
|---|---|---|---|
| श्वासे | गुडकर्पूरवटिका श्र्वासं सघो व्यपोहति | (सि. भे. ४. ३८६) | |
| मूत्राघात | मूत्रे विबद्दे कर्पूरचूर्ण लिडेप्रवेशयेत | (च. द. ३३. १३) | |
| घनसारस्य चूर्णेन बस्तस्याथाविकाम्बुना। गुण्डयित्वा ध्वजे क्षिप्त्वा मूत्ररोघो जहाति तम्॥ | (भा. प्र. चि. ३६ ३२) | ||
| कर्पूरसजा युक्ता वस्त्रवर्ति: शनै: शनै:॥ मेढ्रमार्गान्तरे न्यस्ता मूत्राघातं व्यपोहति॥ | (भा. प्र. चि. ३६. ६७) | ||
| नेत्ररोग | वटक्षीरेण संयुक्तं श्र्लक्षण् कर्पूरजं रज:॥ क्षिप्रमञ्जनतो हन्ति शुक्रं चापि घनोन्नतम्॥ | (वृ. मा ६१. ९७; बं. से. नेत्ररोग १७५) | |
| सघ: क्षत | सघ: कर्पूरसर्पिभ्या पूरित वस्त्रन्त्रित:। शस्त्रप्रहार: संरोहत्यपय: पाकवर्जितअ:॥ | (रा. मा. २६. १; च. द. ४४. ५५) | |
| परिलोहिकर्णपालरोग | बहुशो गोमयैस्तप्तै: स्वेदितं परिलोहिनम्॥ घनसारै: समालिम्पेदजामूत्रेण कल्कितै:॥ | (यो. र. पृ. ३८२) | |
| तृष्णा | कर्पूरचूर्ण तृष्णायां वदने धारयेत् सदा॥ | (का. सं. विशेषकल्प) | |
| कुष्ठव्रण | कुष्ठोद्भवं व्रणमपोहति शीघ्रमेव कर्पूरतैलमसकृत पिचुना निषिक्तम्॥ | (वै. म. १६. ११५) |