Vernacular Names
Chirchita, Chirchita
Apang
Prickly chaff flower
Aghedo
Chirchira, Latjira
Uttarane, Uttaren
Anghada
Puthakanda, Lattajeera
Adhaḥśalya, Mayūraka, Apāmārga, Kharamañjarī, śikharī, Pratyakpuṣpī
Nayuruvi
Uttareni
Chirchita
Relational Concept Map
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🌱 Plant Information
Etymology
| Sanskrit Synonym | Sanskrit (Diacritical) | Reference | Etymology (Sanskrit) | English Meaning |
|---|---|---|---|---|
| अपामार्गः | Apāmārgaḥ | अपाकृत्य दोषान् शरीरं मार्जयति शोधयतीति, यथोक्तं शौनकीयाथर्ववेदे-‘अपामार्ग त्वया वयं सर्वं तदपमृज्महे’ इति (शौ० ४/१७/७) | ||
| अधःशल्यः | Adhaḥśalyaḥ | कण्टकिपुष्पाणामधोमुखत्वात् । | ||
| आघाटः | Āghāṭaḥ | आ समन्ताद् घाटः संघातोऽस्य, ‘घट संघाते’ । | ||
| क्षवकः | Kṣavakaḥ | क्षवथुकरः, अपामार्गतण्डुलानां शिरोविरेचकत्वात् । | ||
| क्षारमध्यः | Kṣāramadhyaḥ | क्षारो मध्ये गात्रेऽस्य, ओषधेः क्षारप्रधानत्वात् । | ||
| खरमञ्जरी | Kharamañjarī | कण्टकित्वात् खरस्मर्शा पुष्पमञ्जरी । | ||
| दुर्ग्रहा | Durgrahā | कण्टकित्वाद् ग्रहीतुं कष्टा । | ||
| प्रत्यकपुष्पा | Pratyakapuṣpā | प्रत्यञ्चि अधोमुखानि पुष्पाण्यस्य । | ||
| मयूरकः | Mayūrakaḥ | मयूर इव विषघ्नः, अथवा मीनाति हिनस्ति रोगान्, ‘मीञ् हिंसायाम्’ । | ||
| मार्गः | Mārgaḥ | मजियति मार्गान् स्रोतांसीति । | ||
| शिखरी | Śikharī | शिखरे पुष्पमञ्जरीत्वात् । |
Classifications
| Name | उपयोगी हिस्सा(हिन्दी) | Part Used(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Leaf | पत्र | Patra | ||
| Root | मूल | Mūla | ||
| Seed | बीज | Bīja | ||
| Whole plant | पञ्चाङ्ग | Pañcāṅga |
| Name | गण(हिन्दी) | Gana(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| अर्कादिगण | Arkādigaṇa | Arkadigana |
| Name | महाकषाय (हिन्दी) | Mahakashaya(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Krimighna Mahakashaya | क्रिमिघ्न महाकषाय | Krimighna mahākaṣāya | ||
| Shirovirechanopaga Mahakashaya | शिरोविरेचनोपग महाकषाय | Śirovirecanopaga mahākaṣāya | ||
| Vamanopaga Mahakashaya | वमनोपग महाकषाय | Vamanopaga mahākaṣāya |
| Name | वर्ग(हिन्दी) | Varga(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Abhayadivarga | अभयादिवर्ग | Abhayādivarga | ||
| Guduchyadivarga | गुडूच्यादिवर्ग | Guḍūcyādivarga | ||
| Oshadhivarga | ओषधिवर्ग | Oṣadhivarga | ||
| Shatahvadivarga | शताह्वादिवर्ग | Śatāhvādivarga |
Properties
| Name | रस (हिन्दी) | Rasa (Diacritical) | Title (Ref. Book) | Author (Ref. Book) | Publisher (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|---|---|
| Tikta | तिक्त | Tikta | ||||
| Katu/Ushana | कटु/उषण | Kaṭu/Uṣaṇa |
| Name | गुण(हिन्दी) | Guna(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Laghu/ Aguru | लघु | Laghu | ||
| Ruksha | रुक्ष | Rukṣa | ||
| Tikshna | तीक्ष्ण | Tīkṣṇa |
| Name | विर्य (हिन्दी) | Virya (Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Ushna Virya | उष्ण वीर्य | Uṣṇa vīrya |
| Name | विपाक (हिन्दी) | Vipaka(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Katu vipaka | Kaṭu vipāka | कटु विपाक |
| Name | कर्म (हिन्दी) | Karma (Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Dipana | दीपन | dīpana | ||
| Pachana | पाचन | pācana | ||
| Mutrajanana/ Mutrala/ Mutravirechaniya | मुत्रजनन/ मूत्रल/ मुत्रविरेचनीय | mutrajanana/ mūtrala/ mutravirecanīya | ||
| Lekhana | लेखन | lekhana | ||
| Shirovirochanopaga | शिरोविरोचनोपग | śirovirocanopaga | ||
| Shothahara/ Shophaghna/ Shothaghna/ Shvayathuhara | शोथहर/ शोफघ्न/शोथघ्न/ श्वयथुहर | śothahara/ śophaghna/śothaghna/ śvayathuhara | ||
| Tvakdoshahara | त्वक्दोषहर | tvakdoṣahara | ||
| Vedanasthapana | वेदनास्थापन | vedanāsthāpana | ||
| Vishaghna/ Vishanashana | विषघ्न/ विषनाशन | viṣaghna/ viṣanāśana | ||
| Vranashodhana/ Dushtavranashodhaka | व्रणशोधन/ दुष्टव्रणशोधक | vraṇaśodhana/ duṣṭavraṇaśodhaka | ||
| Hridya/ Hridayam (Saumanasyakara) | हृद्य/ हृदयं (सौमनस्यकर) | hṛdya/ hṛdayaṃ (saumanasyakara) | ||
| Krrimighna/ Krimihara/ Jamtughna/ Jantuhara/ Jamtunashaka/ Jantunashana/ Jivanu Nashaka | कृमिघ्न/ क्रिमिहर/ जंतुघ्न/ जन्तुहर/ जंतुनाशक/ जन्तुनाशन/ जीवाणु नाशक | kṛmighna/ krimihara/ jaṃtughna/ jantuhara/ jaṃtunā | ||
| Pittanirharana/ Pittasaraka | पित्तनिर्हरण/ पित्तसारक | pittanirharaṇa/ pittasāraka | ||
| Raktashodhaka/ Raktadoshanashaka/ Raktadoshahara | रक्तशोधक/ रक्तदोषनाशक/ रक्तदोषहर | raktaśodhaka/ raktadoṣanāśaka/ raktadoṣahara | ||
| Ruchya/ Arochakahara/ Rochaka/ Ruchikara/ Ruchikrita/ Ruchiprada | रुच्य/ अरोचकहर/ रोचक/रुचिकर/ रुचिकृत/ रूचिप्रद | rucya/ arocakahara/ rocaka/ rucikara/ rucikṛta/ rū | ||
| Vishtambhakara | विष्टम्भकारा | viṣṭambhakārā | ||
| Kandughna | कण्डूघ्न | kaṇḍūghna | ||
| Kushthaghna/ Kushthahara | कुष्ठघ्न/ कुष्ठहर | kuṣṭhaghna/ kuṣṭhahara | ||
| Svedala/ Svedjanana | स्वेदल/ स्वेद्जनन | svedala/ svedjanana |
| Name | दोषकर्म (हिन्दी) | Doshakarma (Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| KaphaVatahara/KaphaVatashamana/ KaphaVstasaṃshamana | कफवातहर/ कफवातशमन/ कफवातसंशमन | KaphaVātahara/KaphaVātaśamana/ KaphaVātasaṃśamana |
Usage
| Name | Dosage(Form) | Dosage(Reference) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Saubhagya Vati | Gutika/Vati/Gulika | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 12:33 | ||
| Gulmakalanala Rasa | Rasa Yoga | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part II, 16:16 | ||
| Gudapippali | Avaleha/Leha/Paka | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 3:8 | ||
| Apamarga Kshara | Kshara | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 10:2 | ||
| Agastya Haritaki Rasayana/Agastya Haritaki/Agastya Rasayana | Avaleha/Leha/Paka | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 3:1 | ||
| Maha Panchagavya Ghrita | Ghrita | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 6:36 | ||
| Maha Vishagarbha Taila | Taila | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 8:46 | ||
| Apamarga Kshara Taila | Taila | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part II, 8:1 | ||
| Abhaya Lavana | Lavana | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 10:3 |
| Name | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|
| Agnimāndya | ||
| Arśa | ||
| aruciḥ | ||
| chardiḥ | ||
| charmaroga | ||
| karṇaśūlaḥ | ||
| krimiroga | ||
| netrarogaḥ/akṣirogaḥ | ||
| udara/udararogaḥ | ||
| Raktavikāra | ||
| Śotha | ||
| Kāsa | ||
| Svasa | ||
| Ashmari | ||
| kustha | ||
| daurbalyam |
Dose
| Name | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|
| Svarasa/ Juice-10-20ml | ||
| Kshar/Alkali-1/2-2gm |
Pharmacopoeial Status
| Name | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|
| The Ayurvedic Pharmacopoeia of india,Part-I,Vol.-II,Pg.No.-07(Whole Plant) | ||
| The Ayurvedic Pharmacopoeia of india,Part-I,Vol.-III, Pg.No.-13(Root) |
Classical Verses Related to Therapeutic Indications
| Vyadhi / Diseases | Context / Formulation | Shloka / Verse | Reference |
|---|---|---|---|
| अत्यग्नौ | क्षुधं हन्यादपामार्गक्षीरगोधारसै: श्रृता॥ | (च. सू. २.३३) | |
| अर्शसि | अपामार्गमूलं वा तण्डुलोदकेन सक्षौद्रमहरह:॥ | (सु. चि. ६. १३) | |
| अर्शसि | अपामार्गस्य बीजानां कल्कस्तण्डुलवारिणा। पीतो रक्तर्शसां नाशं कुरुते नात्र संशय:॥ | (शा. सं. २. ५. १९) | |
| अर्शसि | मयूरवल्ककिञ्जल्कवरीवासाश्रृतं जलम्॥ रक्तार्शसा प्रशमनं स्यात् पलाण्डुरिवाशित:॥ | (वै. म. ५. ८) | |
| अर्शसि | कल्कमपामार्गस्य विमिश्र्य सुजाततक्रेण। सुवसनविलुलन्गलितं पिब रुधिरार्श: सु भेषजं ललितम्॥ | (सि. भे. ४. २२८) | |
| विसूचिका | जलपीतमपामार्गमूलं हन्याद् विसूचिकाम्॥ | (भा. प्र. चि. ६. ११०) | |
| सिध्म | शिखरिरसेन सुपिष्टं मूलकबीजं प्रलेपत: सिध्मम॥ क्षारेण कदल्या वा रजनीमिश्रेण् नाशयति॥ | (वृ. मा. ५१. १७) | |
| सिध्म | प्रलेपात् सिध्म् यात्यस्तमपामार्शस्य भस्मना॥ | (वै. म. ११. ६०) | |
| शर्कराश्मर्यो | तिलापामार्गकदलीपलाशयवसंभव:। क्षार: पेयोऽविमूत्रेण शर्करास्वश्मरीषु च॥ | (अ. ह. चि. ११. ३१) | |
| मूत्रकृच्छ्र | मूत्रकृच्छ्रं जयेत् पीता क्षीरेण शिखरिशिफा॥ | (वै. म. ७. ४) | |
| कष्टप्रसव | अपामार्गसिफं योनिमध्ये निक्षिप् धारयेत्॥ सुखं प्रसूयते नारी भेषजास्यास्य योगत:॥ | (बं. से. स्त्रीरोग. २३३) | |
| कष्टप्रसव | …………………………………मयूरकजटा: पृथक। नाभिबस्तिभगालेपात् सुखं नारी प्रसूयते॥ | (ग. नि. ६. ४. २३) | |
| व्रण | अपामार्गोऽश्वगन्धा च तालपात्री सुवर्चला। उत्सादने प्रशस्यन्ते काकोल्यादिश्र्च यो गण:॥ | (सु. सू. ३७. ३०) | |
| व्रण | मयूरको राजवृक्षो निम्ब: कोशातकी तिला:। बृहती कण्टकारी च हरितालं मन: शिला। शोधनानि च योज्यानि तैले द्रव्याणि शोधने॥ | (सु. सू. ३७. १७-१८) | |
| नाडीव्रण | फलेष्वपामार्गभवेषु चैव कुर्यात समूत्रेषु हिताय तैलम। | (सु. चि. १७. २५) | |
| नाडीव्रण | प्रत्यक्पुष्पीफलयुतैस्तिलै: पिष्टै: प्रलेपयेत्॥ | (वृ. मा. ४७, २) | |
| शस्त्रक्षत | अपामार्गतैलम् | (रा. मा. २६. ७) | |
| शस्त्रक्षत | अपामार्गदलालेप: सघो बध्नाति शोणितम्। | (वै. म. १६. १२०) | |
| शस्त्रक्षत | अपामार्गस्य संसिक्तं पत्रोत्थेन रसेन वा॥ सघोव्रणेषु रक्तं तु प्रव्रुतं परितिष्ठति ॥ | (च. द. ४४. ५२) | |
| नेत्ररोग | प्रत्यक्पुष्पामूलं ताम्रमयभाजने ससिन्धूत्थम। मुस्तुसहितं निघ्रुष्टं नयनोत्कोपं हरत्याशु॥ | (ग. नि. नेत्र. ३. ३. ३६६) | |
| कर्णरोग | मार्गक्षारजलेन तत् कृतकल्केन साधितं तिलजम्॥ अपहरति कर्णनादं वाधिर्य चापि पूरणत:॥ | ( वृ. मा. ५९. २५) | |
| शिरोरोग | …………………………………….. तैलामब्यडात्। शिरजो रुज: समग्रा यदि वापामार्गफसिदम्॥ | (ग. नि. ३. १. १२५) | |
| अलर्कविष | व्रणस्योपरि निष्पीड्य्: प्रत्यक् पुष्पीरसोऽथवा॥ | (अ. सं. उ. ४६. ६४) | |
| प्रदर | अन्यैरनाख्याय कदाचिदाशु मूर्धन्यपामार्गरसोऽ भिषिक्त: | (ग. नि. ६. १. ५४) | |
| शूल | अपामार्गस्य निर्यूहे घृतं वैघो विपाचयेत्॥ पिप्पलीकल्कसंयुक्तं परं शूलविनाशनम्॥ | (स. यो. घृत५) | |
| कामला | अपामार्गशमीमूलं विष्ट्वा तक्रेण पाचयेत्॥ कामलां श्वयथुं पाण्डुं कर्षमात्रं नियच्छति॥ | (र.र.स. १९. १०९) | |
| निद्रानाश | काकजंघा त्वपामार्ग: कोलिलाक्ष: सुपर्णिका। क्वाथो निद्राकर: शीघ्रम | (हा. स. ३. १५. ६) | |
| योनिशूल | पिष्ट्वा लिप्ते योनौ मूलं खरमञ्जदीपुवर्नवयो:॥ नवसूताया: शूलं योनिगतं सकलमपनयत:॥ (वै. म. १३. ४०) अपामार्गपत्रद्वयं योनिमध्ये निविष्टं क्षणाद् योनिशूलं निहन्ति | (ग. नि. ६. ६. १५) |
Classical Verse From Nighantu
| Source | Varga | Verse |
|---|---|---|
| कैयदेवनिघण्टु | ओषधिवर्ग | अपामार्गः शैखरिकः शिखरी खरमञ्जरी | अधःशल्यः क्षारमध्या दुर्ग्रहा दुरभिग्रहः ||१०३२|| आघाटः किणिही मार्गः प्रत्यक्पुष्पी मयूरकः | अपामार्गः कटुस्तिक्तस्तीक्ष्णोष्णो दीपनः सरः ||१०३३|| पाचनो वामनश्छेदी कफमेदोऽनिलापहः | निहन्ति शूलहिध्मार्शोकण्डूदद्रूदरापचीः ||१०३४|| |
| धन्वन्तरिनिघण्टु | गुडूच्यादिवर्ग | अपामार्गस्तु शिखरी प्रत्यक्पुष्पी मयूरकः | अधःशल्योऽथ किणिही दुर्ग्रहा खरमञ्जरी ||२९०|| स चैवोक्तः शैखरिको मर्कटी दुरभिग्रहः | पराक्पुष्पी वशीरश्च कण्टी मर्कटपिप्पली ||२९१|| अपामार्गस्तु तिक्तोष्णः कटुश्च कफनाशनः | अर्शःकण्डूदरामघ्नो रक्तहृद्ग्राहिवान्तिकृत् ||२९२|| |
| भावप्रकाशनिघण्टु | गुडूच्यादिवर्ग | अपामार्गस्तु शिखरी ह्यधःशल्यो मयूरकः | मर्कटी दुर्ग्रहा चापि किणिही खरमञ्जरी ||१८७|| अपामार्गः सरस्तीक्ष्णो दीपनः तिक्तकः कटुः | पाचनो रोचनश्छर्दिकफमेदोऽनिलापहः | निहन्ति हृद्रुजाध्मानकण्डूशूलोदरापचीः ||१८८|| रक्तापामार्ग- रक्तोऽन्यो वसिरो वृत्तफलो धामार्गवोऽपि च | प्रत्यक्पर्णी केशपर्णी कथिता कपिपिप्पली ||१८९|| अपामार्गोऽरुणो वातविष्टम्भी कफकृद्धिमः | रूक्षः पूर्वगुणैर्न्यूनः कथितो गुणवेदिभिः ||१९०|| अपामार्गफलं स्वादु रसे पाके च दुर्जरम् | विष्टम्भि वातलं रूक्षं रक्तपित्तप्रसादनम् ||१९१|| |
| मदनपालनिघण्टु | अभयादिवर्ग | अपामार्गस्तु शिखरी किणिही खरमञ्जरी | अधःशल्यः शैखरिकः प्रत्यक्पुष्पी मयूरका ||१०६|| अपामार्गः सरस्तीक्ष्णो दीपनः कफवातजित् | निहन्ति दद्रुसिध्मार्शः कण्डुशूलोदरारुचीः ||१०७|| |
| राजनिघण्टु | शताह्वादिवर्ग | अपामार्गस्तु शिखरी किणिही खरमञ्जरी | दुर्ग्रहश्चाप्यधःशल्यः प्रत्यक्पुष्पी मयूरकः ||८८|| काण्डकण्टः शैखरिको मर्कटी दुरभिग्रहः | वशिरश्च पराक्पुष्पी कण्टी मर्कटपिप्पली ||८९|| कटुर्माञ्जरिको नन्दी क्षवकः पङ्क्तिकण्टकः | मालाकण्टश्च कुब्जश्च त्रयोविंशतिनामकः ||९०|| अपामार्गस्तु तिक्तोष्णः कटुश्च कफनाशनः | अर्शकण्डूदरामघ्नो रक्तहृद्ग्राहिवान्तिकृत् ||९१|| |
| सोढलनिघण्टु | गुडूच्यादिवर्ग | अपामार्गे तु शिखरी प्रत्यक्पुष्पी मयूरकः ||२६१|| अधःशल्योऽथ किणिही कण्टी मर्कटपिप्पली | क्षवोऽधोमार्कवो घण्टा मर्कटी दुरभिग्रहः ||२६२|| प्रत्यक्श्रेणी च वशिरः कटुश्च खरमञ्जरी |२६३| |