Vernacular Names
Assamese
Aatich
Bengali
Ataicha
Relational Concept Map
Click a category such as Gana to open its related data. Click it again to collapse the data.
🌱 Plant Information
Etymology
| Sanskrit Synonym | Sanskrit (Diacritical) | Reference | Etymology (Sanskrit) | English Meaning |
|---|---|---|---|---|
| अतिविषा | Ativiṣā | विषमतिक्रान्ता । | ||
| अतिसारघ्नी | Atisāraghnī | अतिसारं नाशयति । | ||
| काश्मीरा | Kāśmīrā | कश्मीरे भवा । | ||
| घुणवल्लभा | Ghuṇavallabhā | आशु घुणैः संसृज्यते । | ||
| पित्तवल्लभा | Pittavallabhā | पित्तरोगे फलप्रदा | ||
| अङ्गुरा | Aṅgurā | भज्यते इति शीलमस्याह् । | ||
| माद्री | Mādrī | मद्रदेशे भवा । | ||
| विश्वा | Viśvā | विशाति शरीरमाशु, ‘विश प्रवेशने’ । | ||
| विधा | Vidhā | वेवेष्टि व्यप्नोति शरीरं, ‘विष्लृ व्याप्तौ, अथवा विषं हन्ति, विष ‘विप्रयोगे’ विषजातीयत्वाद्वा । | ||
| शिशुभैषज्यम् | Śiśubhaiṣajyam | बालरोगेषु लाभप्रदा । | ||
| शुक्लकन्दा | Śuklakandā | शुक्लवर्णः कन्दोऽस्याः । | ||
| शृङ्गी | Śṛṅgī | शृङ्गाकारकन्दत्वात्, अथवा शृणानि रोगानिति, ‘शृ हिंसायाम्’ । | ||
| शोफापहा | Śophāpahā | शोफनाशिनी । |
Classifications
Properties
Classical Verses Related to Therapeutic Indications
| Vyadhi / Diseases | Context / Formulation | Shloka / Verse | Reference |
|---|---|---|---|
| विष | तत्र दुग्धैर्गवादीनां सर्पि: सातिविधै: श्रृतम॥ पाने नस्ये च सश्वेतं हितं समदयन्तिकम्॥ | (सु. क. १. ६४) | |
| विष | प्रात: सातिविषं कल्कं लिहयान माक्षिकसंयुतम्॥ | (सु. क. ७. ३९) | |
| बालरोग | मधुनाऽतिविषाश्रृडीपिप्पलीर्लेहयेच्छिशुम्॥ एकां वाऽतिविषां कासज्वरच्छर्दिभिरर्दितम॥ | (अ. ह्र. उअ. २. ५७) | |
| बालरोग | कासज्वरच्छर्दिभिरर्दितानां समाक्षिकां वाऽतिविषां तथैकाम्॥ | (वृ. मा. ६६. १०) | |
| बालरोग | चातुर्भद्रावलेह | (भा. प्र. चि. ७२. १५१) | |
| अतीसार | अतिविषावलेह | बिल्वमोचरसलोध्रधातकीपुष्पचूतफलबीजसंयुता। नाशयेदतिविषाऽवलेहिका सिन्धुवेगमपि दुर्धरं ध्रुवम॥ | (भा. प्र. चि. २. १४८) |
| अतीसार | अड्कोटस्य त्रयो भागा: भागश्र्चैकोऽरुणाभव:। तण्डुलोदकसंपीत: सर्वकुक्ष्यामयापह:॥ | (बं से. ग्रहणी १६७) | |
| आमातिसारे | दघात सतिविषां पेयां सामे साम्लां सनागराम्॥ | (च. सू. २. २२) | |
| ग्रहणीरोग - आमपाचनार्थ | नागरतिविषामुस्तक्वाथ: स्यादामपाचन:। | (च. चि. १५. १८) |