Vernacular Names
Assamese
Borthekera
Bengali
Tikul
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Properties
Classical Verses Related to Therapeutic Indications
| Vyadhi / Diseases | Context / Formulation | Shloka / Verse | Reference |
|---|---|---|---|
| गुल्म | यच्चूर्ण गुटिका याश्र्च विहिता वातगुल्मिनाम्॥ द्विगुणक्षाहिडवमवेतसास्ता: कफे हिता:॥ | (च. चि. ५. १६२) | |
| गुल्म | ……………………… वह्रि संधुक्षयेत्तत:। हिडवादिभिश्र्च द्विगुणक्षारहिडवम्लवेतसै:॥ | (अ. ह्र. चि १४. ७६) | |
| गुल्म | बीजपूरकहिडवम्लवेतसक्षारदाडिमै:। तक्रेण तैलर्पिर्भ्या व्यञ्जनान्युपकल्पयेत्॥ | (च. चि. ५. १६६) | |
| उदावर्त्त | उदावर्त्ते तथाध्माने मातुलुड्गाम्लवेतसै:। हिडपीलुबिडैश्र्चान्नं युक्तं स्यादनुलोमनम्॥ | (च. चि. १७. ८७) | |
| हिक्काश्वास | पुष्कराह्रशटीव्योषमातुलुडाम्लवेतसै:। योजयेदन्नपानानि ससर्पिर्बिडहिड्गभि:॥ | (च. चि. १७. १०४) | |
| मदात्यय | ………………………….प्रदापयेत्॥ व्योषयूषथाम्लं वा यूषं वा साम्लवेतसम॥ | (च. चि. २४. १७२) | |
| अश्मरी | अत्कुञ्चिका हिड्ग सवेतसाम्लं स्याद द्वे बृहत्यी हपुषा वचा च। चूर्ण पिबेत्- | (च. चि. २६. ६१) | |
| अपतन्त्रक | तुम्बरुपुष्करह्रहिडग्वम्लवेतसपथ्यालवणत्रयं यवक्वाथेन पातुं प्रयच्छेत्। | (सु. चि. ५. २१) | |
| अपतन्त्रक | यवक्वाथाम्बुना पेयं हत् पार्श्वार्त्यपतन्त्रके। हिड सौवर्चल शुण्ठी दाडिम साम्लवेतसम्॥ | (अ. ह्र चि. २१. ३६) | |
| महाकुष्ठ मन्थविधानार्थ | खदिराशन……….. गुडूचीनामन्यतमस्य् कषायेण …. दाडिमामलकवेतसाम्लेन …. पाययेत्। | (सु. चि. १०४) | |
| वातिकशूल | विडडशिग्रकम्पिल्लपथ्याश्यामाम्लवेतसान्। सुरसामश्वमूत्रीञ्च सौवर्चलयुतान पिबेत्॥ मघेन वातजं शूलं क्षिप्रमेव प्रशाम्यति॥ | (सु. उ. ४२. ९४-९५) | |
| अर्शसि | कोष्णाम्बुना वा त्रिपटुव्योषहिडग्वम्लवेतसम॥ | (अ. ह्र. चि. ८. ३४) | |
| प्लीहोदरे | अम्लवेतससंयुक्त: शिग्रुक्वाथ: ससैन्धव:। पीत: प्लीहोदरं हन्ति पिप्पलीमरिचान्वित:॥ | (बं से. उदर. १३५) |