Vernacular Names
Gamari
Gamar
Shivani hannu, Shewan
Gambhar Khambhari
Shivani, Shivanigida
Shivan
Gambhari
Kumhar, Gumhar
Nilakumizh
Peggumudu, Peggumaddi
Relational Concept Map
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🌱 Plant Information
Etymology
| Sanskrit Synonym | Sanskrit (Diacritical) | Reference | Etymology (Sanskrit) | English Meaning |
|---|---|---|---|---|
| गम्भारी | Gambhārī | गं गतिं बिभर्तीति । | ||
| कट्फला | Kaṭphalā | कट्फलस्येव फलमस्याः । | ||
| काश्मरी | Kāśmarī | काशते प्रकाशते इति । | ||
| काश्मीरी | Kāśmīrī | कश्मीरादिप्रदेशेषु जायमानत्वात् । | ||
| कृष्णवृन्ता | kṛṣṇavṛntā | कृष्णं वृन्तमस्याः । | ||
| पीतरोहिणी | Pītarohiṇī | त्वचः पीतत्वात् । | ||
| भद्रपर्णी | Bhadraparṇī | भद्राणि पर्णान्यस्याः । | ||
| महाकुम्भी | Mahākumbhī | कुम्भीसदृशी बृहदाकारा । | ||
| महाकुसुमका | Mahākusumakā | महान्ति कुसुमान्यस्याः । | ||
| वातहृत् | Vātahṛt | वातनाशिनी । | ||
| श्रीपर्णी | Śrīparṇī | श्रीमन्ति पर्णान्यस्याः । | ||
| सर्वतोभद्रा | Sarvatobhadrā | सर्वतः कल्याणकारिणी । | ||
| सुफला | Suphalā | शोभनं फलमस्याः । | ||
| स्थूलत्वचा | Sthūlatvacā | स्थूलवल्कला । | ||
| हीरी | Hīrī | हिनोति वर्धते वर्धयति च शरीरं रसायनत्वात्, ‘हि गतौ वृद्धौ च’ \ |
Classifications
| Name | उपयोगी हिस्सा(हिन्दी) | Part Used(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Root | मूल | Mūla | ||
| Fruit | फल | Phala | ||
| Stem | काण्ड | Kāṇḍa |
| Name | गण(हिन्दी) | Gana(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| सारिवादिगण | Sārivādigaṇa | Sarivadigana | ||
| बृहत्पञ्चमूल | Bṛhatpañcamūla | Brihatpanchamula |
| Name | महाकषाय (हिन्दी) | Mahakashaya(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Shothahara Mahakashaya | शोथहर महाकषाय | Śothahara mahākaṣāya | ||
| Dahaprashamana Mahakashaya | दाहप्रशमन महाकषाय | Dāhapraśamana mahākaṣāya | ||
| Virechanopaga Mahakashaya | विरेचनोपग महाकषाय | Virecanopaga mahākaṣāya |
| Name | वर्ग(हिन्दी) | Varga(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Guduchyadivarga | गुडूच्यादिवर्ग | Guḍūcyādivarga | ||
| Oshadhivarga | ओषधिवर्ग | Oṣadhivarga |
Properties
| Name | रस (हिन्दी) | Rasa (Diacritical) | Title (Ref. Book) | Author (Ref. Book) | Publisher (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|---|---|
| Tikta | तिक्त | Tikta | ||||
| Madhura/Svadu | मधुर/स्वादु | Madhura/Svādu | ||||
| Kashaya/Tuvara | कषाय/तुवर | Kaṣāya/Tuvara |
| Name | गुण(हिन्दी) | Guna(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Guru | गुरु | Guru |
| Name | विर्य (हिन्दी) | Virya (Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Ushna Virya | उष्ण वीर्य | Uṣṇa vīrya | Dravyaguna Vigyan | fruit- Sita virya (Dravyaguna Vigyan by PV Sharma vol-II, pg. no.- 225) |
| Name | विपाक (हिन्दी) | Vipaka(Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Katu vipaka | Kaṭu vipāka | कटु विपाक |
| Name | कर्म (हिन्दी) | Karma (Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Kaphashamaka/ Kaphaghna/ Kaphahara/ Kaphanashaka/ Kaphapaha/ Kaphajita | कफशामक/ कफघ्न/ कफहर/ कफनाशक/ कफापहा/ कफजित | kaphaśāmaka/ kaphaghna/ kaphahara/ kaphanāśaka/ ka | ||
| Shothahara/ Shophaghna/ Shothaghna/ Shvayathuhara | शोथहर/ शोफघ्न/शोथघ्न/ श्वयथुहर | śothahara/ śophaghna/śothaghna/ śvayathuhara | ||
| Dipana | दीपन | dīpana | ||
| Pachana | पाचन | pācana | ||
| Medhya/ Medhakara/ Medhavardhaka | मेध्य/ मेधाकर/ मेधावर्धक | medhya/ medhākara/ medhāvardhaka | ||
| Bhedana | भेदन | bhedana | ||
| Vishaghna/ Vishanashana | विषघ्न/ विषनाशन | viṣaghna/ viṣanāśana | ||
| Dahaprashamana | दाहप्रशमन | dāhapraśamana |
| Name | दोषकर्म (हिन्दी) | Doshakarma (Diacritical) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Tridoshahara/ Tridoshashamana | त्रिदोषहर/ त्रिदोषशमन | Tridoṣahara/ Tridoṣaśamana |
Usage
| Name | Dosage(Form) | Dosage(Reference) | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|---|---|
| Drakshadi Kvatha Churna | Kvatha Churna/Kashaya Churna | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 4:13 | ||
| Dashamularishta | Arishta | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 1:18 | ||
| Dashamula Shatpalaka Ghrita | Ghrita | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 6:17 | ||
| Dashamula Haritaki | Avaleha/Leha/Paka | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 3:14 | ||
| Dashamula Ghrita | Ghrita | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 6:16 | ||
| Aravindasava | Asava | Ayurvedic Formulary of India (AFI), Part I, 1:4 |
| Name | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|
| vibandha | ||
| jvaraḥ | ||
| garbhapātaḥ | ||
| bhramaḥ | ||
| Agnimāndya |
Dose
| Name | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|
| Decoction- 50-100ml |
Pharmacopoeial Status
| Name | Title (Ref. Book) | Reference Remarks |
|---|---|---|
| The Ayurvedic Pharmacopoeia, Part I, Vol. I, Pg. No.36(Root bark) | ||
| The Ayurvedic Pharmacopoeia, Part I, Vol. II, Pg. No. 42(Fruit ) | ||
| The Ayurvedic Pharmacopoeia, Part I, Vol. III, Pg. No. 53(Stem) | ||
| The Ayurvedic Pharmacopoeia, Part I, Vol. IV, Pg. No.31 (Stem bark) |
Classical Verses Related to Therapeutic Indications
| Vyadhi / Diseases | Context / Formulation | Shloka / Verse | Reference |
|---|---|---|---|
| पित्तज्वर | ………….काश्मर्यस्याथवा पुन:। …………………कषायै: शर्करायुतै:॥। सुशीतै: शमयेतृष्णां प्रवृद्दां दाहमेव च॥ | (सु. उ. ३९. १७९-८०) | |
| वातज्वर | द्राक्षादिक्वाथ | (सु. उ. ३९. १७३) | |
| अतिसार | काश्मर्यफलयूशो वा किञ्चिदम्ल: सशर्कर:॥ | (च. चि. १९, ७४; अ. ह्र. चि. ९. ८४) | |
| रक्तार्श | काश्मर्यामलकानां सकर्बुदारान् फलाम्लांश्र्च। गृञ्जनकशाल्मलीनां क्षीरिण्याशुक्रिकायाश्र। न्यग्रोधशुंगकानां खडांस्तथा कोविदारपुष्पाणाम्। दध: सरेण सिददान दघाद् रक्ते प्रवृतेऽति॥ | (च. चि. १४. २०२. ३) | |
| रक्तपित्त | पक्वदुम्बरकाशमर्यपथ्याखर्जूरगोस्तना:॥ मधुना घ्नन्ति संलीढा रक्तपित्तं पृथक पृथक॥ | (च. द. ९. २५) | |
| रक्तपित्त | कोविदारस्य पुष्पाणि काश्मर्यस्वाथ शाल्मले:। अन्नपानविधी शाकं यच्चान्यद् रक्त्तपित्तनुत्॥ | (च. चि. ४. ३९) | |
| पाण्डुरोग | दन्तीपलरसे कोष्णॆ काश्मर्याञ्जलिमाप्लतम्। द्राक्षाञ्जलिं वा मृदितं तत् पिबेत् पाण्दुरोगजित॥ | (अ. ह्र. चि. १६, ६) | |
| तृष्णा | काश्मर्यादिपानकम् | (भे. सं/ चि. ३० ३७-३९) | |
| तृष्णा | लाजोदकं मधुयुतं घॄतं गुडविमिश्रितम्। काश्मर्य शर्करायुक्तं पिबेत्तृष्णार्दितो नर:॥ | (वृ. मा. १६. ९) | |
| वातरक्त | काश्मर्यमधुकतर्पणकल्को वा॥ | (सु. चि. ५. १२) | |
| वातरक्त | गुडूचीरसदुग्धाभ्यां तैलम् द्राक्षारसेन वा। सिद्द मधुककाश्मर्यरसैर्वा वातरक्तनुत्॥ | (च. चि. २९. १२९) | |
| शीतपित्त | कालेन पाकं प्रतिपघ शुष्कं गव्येन सिद्दं पयसोप्यक्म्। काश्मर्यमाशु प्रतिहन्ति शीतपित्तं हिताहाररतेन लीढम्॥ | (रा. मा. ८. १२; च. द. ५१. १२) | |
| रसायन | काश्मर्य- रसायन | (सु. चि. २७. ९; अ. सं. ४९ ४०२) | |
| गर्भशोषे बालशोषे च | गर्भे शुष्के तु वातेन बालानाञ्चापि शुष्यताम्। सिताकाश्मर्यमधुकै: हितमुत्थापने पय:॥ | (च. चि. २८. ९५) | |
| अंगुलिवेष्ट | काश्मर्या: सप्तभि: पत्रै: कोमलै: परिवेष्टित:॥ अंगुलिवेष्टक: पुंसां ध्रुवमाशु प्रशाम्यति॥ | (भा. प्र. ६१. ७७) | |
| कुचोत्थापन | श्रीपर्णीरसकल्काभ्यां तैलं सिद्दं तिलोदभवम्। तत्तैलं तूलके न्यस्य स्तनयो: परिधारयेत्। पतितावुत्थितौ स्त्रीणां भवेयातां पयोधरौ॥ गजकुम्भसमाकारावुन्नतौ परिमण्डलौ॥ | (बं. से. स्त्रीरोग. ३६८-६९) | |
| पलित | बिभीतनिम्बगंभारी……… एकैकतैलनस्येन पलितं नश्यति ध्रुवम्॥ | (शा.स. ३. ८. ४६) | |
| पलित | काश्मर्यमूलसारप्रसूनफलपत्रत: कषायेण। कल्केनाक्षकतैलं पक्वं पलितापहं नस्यम्॥ | (ग. नि. ३. ९. ९६) | |
| पलित | काश्मर्यादितैलम॥ | (भा. प्र्. चि. ६१. ४) |
Classical Verse From Nighantu
| Source | Varga | Verse |
|---|---|---|
| कैयदेवनिघण्टु | ओषधिवर्ग | श्रीपर्णा सर्वतोभद्रा काश्मीरी काश्मरी मुदा ||२८|| गम्भारी कट्फला हीरा काश्मर्या मधुपर्णिका | कृष्णवृन्ता भद्रपर्णी कुम्भारी सफला मही ||२९|| श्रीपर्णी मधुरा तिक्ता वीर्योष्णा तुवरा गुरुः | दीपनी पाचनी मेध्या भेदनी भ्रमशोषजित् ||३०|| दोषतृष्णामशूलार्शोविषदाहज्वरापहा | तत्पुष्पं मधुरं शीतं तिक्तं सङ्ग्राहि वातलम् ||३१|| कषायं मधुरं पाके पित्तास्रासृग्दरापहम् | कफपित्तहरं तस्याः फलं स्निग्धं हिमं गुरु ||३२|| स्वादुपाकरसंहृद्यं कषायाम्लं रसायनम् | बृंहणं शुक्रलं केश्यं मेध्यं मूत्रविबन्धनुत् ||३३|| हन्याद्वाततृषादाहपित्तरक्तक्षतक्षयान् |३४| |
| धन्वन्तरिनिघण्टु | गुडूच्यादिवर्ग | काश्मर्या काश्मरी हीरा काश्मर्यो मधुपर्ण्यपि | श्रीपर्णी सर्वतोभद्रा गम्भारी कृष्णवृन्तका ||१३२|| श्रीपर्णी स्वरसे तिक्ता गुरूष्णा रक्तपित्तजित् | त्रिदोषश्रमदाहापित्तार्तिज्वरतृष्णाविषाञ्जयेत् ||१३३|| श्रिपर्णी स्वादुतिक्ता च रक्तपित्तज्वरापहा | कास्मर्यं कुसुमं वृष्यं बल्यं पित्तास्रनाशनम् ||१३४|| |
| भावप्रकाशनिघण्टु | गुडूच्यादिवर्ग | गम्भारी भद्रपर्णी च श्रीपर्णी मधुपर्णिका | काश्मीरी काश्मरी हीरा काश्मर्यः पीतरोहिणी | कृष्णवृन्ता मधुरसा महाकुसुमिकाऽपि च ||१२|| काश्मरी तुवरा तिक्ता वीर्योष्णा मधुरा गुरुः | दीपनी पाचनी मेध्या भेदिनी भ्रमशोषजित् | दोषतृष्णामशूलार्शोविषदाहज्वरापहा ||१३|| तत्फलं बृंहणं वृष्यं गुरु केश्यं रसायनम् | वातपित्ततृषारक्तक्षयमूत्रविबन्धनुत् ||१४|| स्वादु पाके हिमं स्निग्धं तुवराम्लं विशुद्धिकृत् | हन्याद्दाहतृषावातरक्तपित्तक्षतक्षयान् ||१५|| |
| मदनपालनिघण्टु | अभयादिवर्ग | काश्मरी सर्वतोभद्रा श्रीपर्णी कृष्णवृन्तिका | गम्भारी कश्मरी हीरा काश्मर्या भद्रपर्णिका ||५०|| काश्मरी ज्वरशूलघ्नी वीर्योष्णा मधुरा गुरुः | तत्पुष्पं वातलं ग्राहि पित्तासृक्प्रदराहरम् ||५१|| फलं रसायनं केश्यं बृंहणं शुक्रलं गुरु | वातपित्तक्षयतृषारक्तमूत्रविबन्धनुत् ||५२|| |
| राजनिघण्टु | प्रभद्रादिवर्ग | स्यात्काश्मर्यः काश्मरी कृष्णवृन्ता हीरा भद्रा सर्वतोभद्रिका च | श्रीपर्णी स्यात्सिन्धुपर्णी सुभद्रा कम्भारी सा कट्फला भद्रपर्णी ||३५|| कुमुदा च गोपभद्रा विदारिणी क्षीरिणी महाभद्रा | मधुपर्णी स्वभद्रा कृष्णा श्वेता च रोहिणी गृष्टिः ||३६|| स्थूलत्वचा मधुमती सुफला मेदिनी महाकुमुदा | सुदृढत्वचा च कथिता विज्ञेयोनत्रिंशतिर्नाम्नाम् ||३७|| काश्मरी कटुका तिक्ता गुरूष्णा कफशोफनुत् | त्रिदोषविषदाहार्तिज्वरतृष्णास्रदोषजित् ||३८|| |
| सोढलनिघण्टु | गुडूच्यादिवर्ग | काश्मर्ये काश्मरीहीरा काश्मीरी मधुपर्ण्यपि ||१७७|| श्रीपर्णी सर्वतोभद्रा गम्भारी कृष्णवृन्तिका | कुमुदा भद्रपर्णी च सदाभद्रा च कट्फला ||१७८|| श्वेता स्थूलत्वचा स्निग्धा पवित्रा वातहृद् दृढा | रोहिणी सफला भद्रा गोपभद्रा विदारिका ||१७९|| महाकुमुदिका गृष्टिर्मही मधुमती मुदी |१८०| |