Vernacular Names
Bengali
Aalkushee
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Etymology
| Sanskrit Synonym | Sanskrit (Diacritical) | Reference | Etymology (Sanskrit) | English Meaning |
|---|---|---|---|---|
| कपिकच्छूः | Kapikacchūḥ | कपीनां कच्छूहेतुत्वात् । | ||
| अजडा | Ajaḍā | जाड्यं क्लैब्यं निवारयतीति । | ||
| अध्यण्डा | Adhyaṇḍā | अण्डवत् प्रकृष्टबीजा । | ||
| आत्मगुप्ता | Ātmaguptā | आत्मना स्वत एव रक्षिता रोमभिः । | ||
| कण्डुरा | Kaṇḍurā | कण्डूं राति ददाति । | ||
| कपिरोमफला | Kapiromaphalā | कपिरोमावद् रोमाणि फलेष्वस्याः । | ||
| दुरभिग्रहा | Durabhigrahā | रोमशत्वाद् ग्रहीतुं दुःशका । | ||
| प्रावृषायणी | Prāvṛṣāyaṇī | प्रावृषि जातत्वात् । | ||
| मर्कटी | Markaṭī | मर्कटवट् रोमशा, मर्कटवत् कामवर्धनी च । | ||
| लाङ्गूली | Lāṅgūlī | मर्कटलाङ्गूलाकृतिः रोमशा च शिम्बी । | ||
| वनशूकरी | Vanaśūkarī | वने जाता धूकरवद् रोमशा च । | ||
| वृषभी | Vṛṣabhī | वृष्यत्वात् । | ||
| वृष्यबीजा | Vṛṣyabījā | वृष्याणि बीजान्यस्याः । | ||
| शूकशिम्बी | Śūkaśimbī | शूकयुक्ता शिम्बी अस्याः । |
Classifications
Properties
Classical Verses Related to Therapeutic Indications
| Vyadhi / Diseases | Context / Formulation | Shloka / Verse | Reference |
|---|---|---|---|
| वाजीकरणे | क्षीरपक्वांस्तु गोधूमानात्मगुप्ताफलै: सह। शीतान् घृतयुतान् खादेत्तत: पश्र्चात पिबेत् पय:। | (सु. चि. २६, ३०) | |
| वाजीकरणे | स्वयंगुप्तेक्षुरकयो: फलचूर्ण सशर्करम्। धारोष्णेन नर: पीत्वा पयसा न क्षयं व्रजेत्॥ | (सु. चि. २६, ३३) | |
| वाजीकरणे | वानरी वटिका | (भा. प्र. चि. ७२, ७१ -७५) | |
| क्रिमिरोगे | गर्भे गुडस्य पिहितानि तनुत्रशिब्यो रोमाणि वक्त्रमभितो हविषा विलप्य। द्विस्त्रिर्गिलेत क्रिमिजरुक्षु विसूचिकायामुद्रिक्तरवमथावपि शर्मकाम:॥ | (सि. भे. ४. २८०) | |
| वातव्याधी | ………………..तथात्मगुप्तास्वरसं पिबेद् वा। ……………मासाद् भवेद् वज्रसमानबाहु:॥ | (च. द. २२. २७) | |
| माषलादिक्वाथे | (च. द. २२. २४) |