Vernacular Names
Bengali
Mota Kalajira
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Etymology
| Sanskrit Synonym | Sanskrit (Diacritical) | Reference | Etymology (Sanskrit) | English Meaning |
|---|---|---|---|---|
| कालाजाजी | Kālājājī | काला कृष्णवर्णा आजाजी अग्निदीपनी जीरकवत् । | ||
| उपकुच्चिका | Upakuccikā | कुटिलाकारत्वात्, ‘कुञ्च कौटिल्याल्पीभावयोः’ । | ||
| कालिका | Kālikā | कृष्णवर्णा । | ||
| जारणी | Jāraṇī | जरणमग्निं दीपयति । | ||
| पृथ्वीका | Pṛthvīkā | स्थूलकणत्वात्, प्रख्यातोपयोगित्वाच्च, ‘प्रथ प्रख्याने’ । | ||
| योनिशूलघ्नी | Yoniśūlaghnī | योनेः शूलं हन्तीति । | ||
| सुगन्धा | Sugandhā | भोभनो गन्धोऽस्यः । | ||
| सुषवी | Suṣavī | सुष्ठु अग्निं प्रेरयति मलञ्च । | ||
| स्थूलजीरकः | Sthūlajīrakaḥ | बृहत्कणत्वात्, जीरकवच्च । |
Classifications
Properties
Classical Verses Related to Therapeutic Indications
| Vyadhi / Diseases | Context / Formulation | Shloka / Verse | Reference |
|---|---|---|---|
| रक्तपित्त | लोहगन्धिनि नि:श्वासे उद्गारे धूमगन्धिनि। पृथ्वीकां शाणमात्रां च खादेद् द्विगुणशर्कराम्॥ | (वृ. मा. ९ २५) | |
| अर्श | तक्रारिष्ट | ( अ. ह्र चि. ८. ४५-४७) | |
| गुल्म | क्षारागद | (अ. ह्र. चि. १४, १०२-१०६) | (अ. ह्र. चि. १४, १०२-१०६) |
| उदर | नारायणचूर्ण | (च्. चि. १३. १२५-३२) | |
| अश्मरी | उत्कुञ्चिका हिड सेवतसाम्लं स्याद् द्वे बृहत्यौ हपुषा वचा च। चूर्ण पिबेदश्मरिभेदपक्वं सर्पिश्र्च गोमूत्रचतुर्गुणं तै:॥ | (च. चि. २६. ६१) | |
| प्रतिश्याय | घ्रेयाश्र्च रोहिषाजाजीवचातर्कारिचोरका:। त्वक्पत्रमरिचैलानां चूर्णा वा सोपकुञ्चिका:॥ | (च. चि. २६. १३८) | |
| अपरापातन | तथा सूक्ष्मैलाकिलिमकुष्ठनागरविडडपिप्पली- कालागुरुचव्यचित्रकोपकुञ्चिकाकल्कं…………पाययेदेनाम्॥ | (च. शा. ८. ४९) | |
| योनिशूल | वचोपकुञ्चिकाजाजीकृष्णावृषकसैन्धवम्। अजमोदायवक्षारशर्कराचित्रकान्वितम्॥ पिष्ट्वा प्रसन्नयाऽलोड्य् खादेत् घृतभर्जितम्॥ योनिपाश्र्वार्त्तिहद्रोगगुल्माशविनिवृत्तये॥ | (अ. ह्र उ, ३४ ३०-३१) | |
| योनिशूल | वृषकं मातुलुडस्य मूलानि मद्यन्तिकाम्। पिबेन मघै: सलवणैस्तथा कृष्णोपकुञ्चिकै:॥ | (अ. ह्र उ. ३४. ३२) |