Vernacular Names
Assamese
Chirta
Bengali
Chirata
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Etymology
| Sanskrit Synonym | Sanskrit (Diacritical) | Reference | Etymology (Sanskrit) | English Meaning |
|---|---|---|---|---|
| किरातः | Kirātaḥ | किरातदेशे भवः, किरति रोगानिति च । | ||
| अनार्यतिक्तः | Anāryatiktaḥ | अनार्यक्षेत्रे किरातदेश भवस्तिक्तरसः । | ||
| काण्डतिक्तः | Kāṇḍatiktaḥ | काण्डस्तिक्तोऽस्य । | ||
| किराततिक्तः | Kirātatiktaḥ | किरातदेशे भवस्तिक्तरसः । | ||
| कैरातः | Kairātaḥ | किरातदेशे भव । | ||
| भूनिम्बः | Bhūnimbaḥ | ह्रस्वक्षुपः, निम्बवत्तिक्तश्च । | ||
| रामसेवकः | Rāmasevakaḥ | रामस्य सेन किराताः, तस्या अयम्, तद्देशे भव इत्यर्थः । | ||
| हैमः | Haimaḥ | हिमवत्प्रदेशे भवः । |
Classifications
Properties
Classical Verses Related to Therapeutic Indications
| Vyadhi / Diseases | Context / Formulation | Shloka / Verse | Reference |
|---|---|---|---|
| ज्वर | ननु रामसेनफाण्ट: प्रविरलधान्याकदलधन्य:। किं कुरुते वैघपते ज्वरं झटिति जर्जरीकुरुते॥ | (सि. भे. ४. ३२) | |
| ग्रहणीरोग | भूनिम्बाघं चूर्णम् | (च. चि. १५. १३२-३३) | |
| किराताघं चूर्णम् | (च्. चि. १५ १३७-४०) | ||
| शोथ | हन्यात् त्रिदोषं चिरजञ्च शोथं कल्कश्र्च भूनिम्बमहौषधस्य॥ | (च. चि. १२. ४२) | |
| भूनिम्बविश्वकल्कं जग्ध्वा पेय: पुनर्नवाक्काथ:॥ अपहरति नियतमाशु श्वयथुं सर्वाड्गगं नृणम्॥ | (वृ. मा. ३९. १७) | ||
| स्तन्यशोधन | पाययेताथवा स्तन्यशुद्दये रोहिणीश्रृतम्। अमृतासप्तपर्णत्वक्काथं चैव सनागरम्॥ किराततित्ककक्वार्थ श्र्लोकपादेरितान पिबेत्॥ त्रीनेतान् स्तन्यशुद्द्यर्थमिति सामान्यभेषजम्॥ | (च. चि. ३० २६१-६२) | |
| विस्फोटक | भूनिम्बादिकषाय | (ग. नि. २. ४० १६) | |
| रक्तपित्त | किराततिक्त क्रमुकं समुस्तं………………… पृथक पृथक् चन्दनयोजितानि तेनैव कल्पेन हितानि तत्र॥ | (च. चि. ४. ७४.-७६) | |
| छर्दि | पीतो भूनिम्बकल्कश्र्च शर्करासमभागत:। छर्दि हरेच्च ह्रत्क्लेशं मधुना वा समन्वित:॥ | (हा. सं. ३. ५१. ६) |